गुरुवार, जनवरी 11, 2007

गुसल गवैये

हम गुसल गवैया हैं, गुसलखाने में घुसते ही सारे नये-पुराने गाने याद आ जाते हैं और हम पंचम सुर में बिना रेडियो वाले अपने पड़ोसियों को मुफ्त में ही विविध भारती सुना देते हैं.
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गाते-नहाते एक दिन ख्याल आया कि हमारे देश के नामी गिरामी लोग गुसलखाने में कौन सा गीत गाते होंगे, सो हमने अपने हरी राम नाई को सम्मन भेजा और आदेश दिया कि जाओ हरी राम और लप-झप करके खबर खोद कर लाओ कि कौन क्या गा रहा है.

जो खबर आई है वो आपके सामने है;
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अटल:

कितने लोगों से मैं मिल कर भूल जाता हूं
मेरी आदत है अकसर मैं भूल जाता हूं
देखो फिर कुछ भूल गया मुझको याद दिलाना
मेरा क्या नाम है.....

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....अंजाना

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मनमोहन:
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उसको तो ना देखा हमने कभी, पर उसकी ज़रूरत क्या होगी
ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी


(हरी राम ने यह भी सूचना दी है कि शावर के नीचे यह गाना गाते समय सिंह साहब के मुखमण्डल से अपार श्रद्धा के भाव टपक रहे थे, उन्होनें आंखें मूंद रखी थीं और हाथ जुड़े हुये थे)

मुलायम:

वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ
जहां तुम हो वहां मैं भी हूं

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अमर:
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अरे बचना ऐ हसीनों लो मैं आ गया
हुस्न का आशिक
हुस्न का दुश्मन
अपनी अदा है यारों से जुदा
हे..हो..

शिबू:

तनहाई..ई...ई...ई..ई
तनहाई...
दिल के रास्ते पर कैसी ठोकर मैंने खाई
टूटे ख्वाब सारे एक मायूसी है छाई
हर खुशी सो गयी
ज़िंदगी खो गयी...


शरद:
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जो सोचें जो चाहें वो करके दिखा दें
हम वो हैं जो दो और दो पांच बना दें
अरे..तूने अभी देखा नहीं देखा है तो जाना नहींईईई...


लालू:
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रेल गाड़ी छुक छुक छुक छुक
रेल गाड़ी छुक छुक छुक छुक
बीच वाले टेशन बोलें
रुक रुक रुक रुक रुक रुक
उ..उ..उ..ऊ...


सोनिया:
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खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देश – परदेश


उधर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वे तमाम कार्यकर्ता जो विधान सभा चुनाव में टिकट की आशा लगाये बैठे हैं, राहुल बाबा की फोटो गुसलखाने में टांग कर यह गाना गाते पाये गये;
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नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुठ्ठी में क्या है
नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुठ्ठी में क्या है


(हरी राम नाई ने बताया कि साहब दैवीय चमत्कार हो गया और राहुल बाबा फोटो के अंदर से ही गाने लगे)
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मुठ्ठी में है तकदीर तुम्हारी
मुठ्ठी में है तकदीर तुम्हारी
हमने किस्मत को बस में किया है

(हरी राम ने बताया कि यह गीत सुन कर सारे कार्यकर्ता आती जाती हर बस में घुस घुस कर देख रहे हैं कि कहीं उनका टिकट किसी बस में रख कर तो नहीं भेजा जा रहा है. एक हताश कार्य कर्ता आज सुबह गुसलखाने में यह गाता पाया गया)

ना कुछ तेरे ‘बस’ में जूली
ना कुछ मेरे ‘बस’ में


चुनाव आ रहे हैं तो फिर गठबंधन भी होंगे, लोग अब गुसलखाने से बाहर निकल कर और गाना गा गा कर एक दूसरे को खुलेआम रिझा भी रहे हैं. आज हरी राम नाए ने माया के घर के सामने कल्याण को यह गाना गाते सुना
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वई वई
आया हूं मैं तुझको ले जाऊंगा
अपने साथ तेरा हाथ थामके

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(हरी ने बताया कि हुज़ूर अंदर से भी गाने की आवाज़ आई)
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वई वई
नहीं रे नहीं मैं नहीं जाऊंगी
तेरे साथ तेरा हाथ थाम के


हरी राम अभी भी अपने काम पर लगा है, और खबर आते ही आगे भी बताऊंगा. इस बीच आप संगीतप्रेमियों को भी कोई खबर मिले तो मुझे अवश्य बताइयेगा. तब तक हम चले गुसलखाने – कुछ गाना वाना गाने.
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ठंडे ठंडे पानी से नहाना चाहिये
गाना आये या ना आये गाना चाहिये...

12 टिप्‍पणियां:

Aflatoon ने कहा…

कुछ कार्यकर्ता(पुराने) शायद गुनगुना रहे हों-
'अपनी ही 'बस' मे नहीं मैं,दिल है कहीं तो हूँ कहीं मैं"।कानपुरिया जयसवाल इसे बदल कर "अपने ही 'टेम्पू' में नहीं मैं" गायें ,यह मुमकिन है।
वैसे यह तय है कि राहुल ऐसे किसी गुसलखाने में नहीं होंगे जहाँ लिखा रहता है,'आपका भविष्य आपके ..'

जगदीश भाटिया ने कहा…

बहुत खूब, चुनावों का असर ब्लागरों पर भी छाने लगा है। :)

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सही, अनुराग. लग रहा है अभी उप्र से लौटे हो. काफी असर छा गया है. :)

Divine India ने कहा…

अच्छा व्यंग...बड़ी सहजता से अतिसुंदर नाटकीय
प्रस्तुति...

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

बाथरूम संगीत सभा का चित्रण अच्छा किया मित्रवर
सहसा ही आदित्य ओम की रचना की यादें घिर आई
जिसमें चित्रित किया हुआ है एक जगह, अनगिनती तेवर
कहीं राम गथा चलती हैं कहीं रास करते कन्हाई

आशीष ने कहा…

अईयो अम आशीष है जी,साउथ से समाचार देता है जे....
जया अम्मा ये गाना गा रहा है जे...

क्या करूं राम मुझे बुढ्ढा मिल गया...


करुणानिधी अपने बाथ रुम जाते हुये...

साला मै तो साहब बन गया...

देवगौडा शावर के निचे बीच बीच मे झपकी मार रहा है ओर गा रहा है जे

ओ सोने दो सोने दो सोने दो सोने दो सोने दो
मुझ को नींद आ रही है सोने दो
दिल कह रहा है कुछ होने दो
हां मुझ को नींद ...
कुछ होने दो होने दो होने दो होने दो होने दो
मुझ को नींद ...

धरमसिंह...(अईयो वो मोटा भूतपुर्व चेफ मिनिस्टर जे)

दोस्त दोस्त ना रहा प्यार प्यार ना रहा
जिन्दगी हमे तेरा ऐतबार ना रहा...

चंद्राबाबु नाय़डू

वक्त ने किया क्या हंसी सीतम ...
हम रहे ना हम , तुम रहे ना तुम....

Upasthit ने कहा…

Abhi abhi UP se ayele lagte hain, Singapore me log gusal khano me nibandh padhte hain kya... vahan ke chitron ka intjaar hai....

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

अरे मान्यवर, कमाल का व्यंग्य लाए हैं ।

गिरिराज जोशी ने कहा…

मजा आ गया अनुराग जी.

लगता है हास्य-व्यंग्य मंत्रालय का प्रभार आजकल आपके पास है, आज कार्य कर रहे हो। हास्य-व्यंग्य मंत्रालय इसी तरह अपना कार्य करता रहेगा ऐसी उम्मीद है।

अब हम चले गाना गानें :)

Manish ने कहा…

बहुत अच्छे गीत चुने आपने इन राजनीतज्ञों के लिये :)

rajeshgupta ने कहा…

हरी राम नाई ने अभी अभी बताया कि अमर सिह आज कल hutch dog की तरह अमित जी के पीछे पीछे बस ये गुन्गुना रहे है………
तू जहा जहा चलेगा…… मेरा साया साथ हो…गा

अतुल श्रीवास्तव ने कहा…

और जनता जनार्दन ये गाती हुई पाई गई -

इस दिल के टुकड़े हजार हुये,
कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा.

वैसे मैं एक दुविधा में हूँ कि ये गाना अमर सिंह अमिताभ के लिये गाते हैं या अमिताभ अमर सिंह के लिये:

हमने तो दिल को आपके कदमों में रख दिया..

वैसे सुना गया है कि जॉर्ज बुश को भी हिन्दी गानों का चस्का लग गया है. अभी हाल ही में महराज ये गुनगुनाते हुए पाये गये:

मैं तो एक पागल...

वैसे मुलायम, रबड़ी, मायावती और लालू जैसे नाम सुनते ही सिर्फ हरि ओम शरण का भजन ही याद आता है -

तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे..