शुक्रवार, नवंबर 10, 2006

"El Ningun Fumar"

कल दोपहर को एक फोन आया। फोन पर जो नंबर दिख रहा था वह था तो सिंगापुर का लेकिन अपरिचित सा। सोचा ना जाने किसका फोन होगा, सकुचाते हुये फोन लिया, " हलो…!?"

"क्यों बे पहचाना?"

" अरे तुमको कौन भूल सकता है भाई!", मेरे पुराने मित्र रोहित जिनके साथ मैं 1991 में 'जग पालक' नाम के जहाज पर Sail किया था। पुराने दिनों की बातें छिड़ीं, कुछ इधर की कुछ उधर की फिर मैं ने रोहित को शाम को Dinner का न्योता दिया।

"नहीं यार खाने वाने पर आना मुश्किल है। हम यहां बस bunkering (re-fueling) के लिये रुके हैं और 4 - 5 घंटे में sail out कर जाएगे। हम तो बस anchorage से ही सिंगापुर की skyline निहार कर चलते हो लेंगे।"

इस छोटी सी वार्तालाप के खत्म होते ही एक पुरानी बात याद आ गयी। 1991 में 'जग पालक' पर हम दोनो साथ थे। 'Aviation Gasoline' load करने के लिये हमारा जहाज़ 'फ़्रांस' के 'लवेरा' बंदरगाह गया। उस समय हम Second Officer और रोहित Cadet हुआ करते थे। हम दोनो जहाज पर 'रात के राजा' के नाम से पुकारे जाते थे, और वो इसलिये क्योंकि पोर्ट में हम दोनों के duty hours हुआ करते थे 18:00 hours to 06:00 hours, यानि कि शाम के 6 बजे से सुबह के 6 बजे तक हम cargo watch पर रहते थे, मतलब सारी रात जगे रहते थे - इसलिये 'रात के राजा'।

अब क्योंकि रात भर जागते थे तो दिन भर की छुट्टी रहती थी, तो दिन में हम लोग घुमैय्या करने shore leave पर निकल जाया करते थे।

लवेरा में हमारा जहाज सुबह 10 बजे berth हुआ। मतलब यह कि मैं और रोहित शाम के 6 बजे तक यानि कि पूरे 8 घंटे मुक्त! सोचा कि चलो भैया घुम्मी घुम्मी कर आयें। नहा धो कर, सेंट वेंट लगा कर हम दो छड़े निकल पड़े।

Gangway से उतर कर कुछ दूर चले थे कि रोहित ने बड़े दार्श्निक अंदाज़ में पूछा, "अबे इस जगह का नाम क्या है?"

"लवेरा"

"लवेरा तो पूरे पोर्ट का नाम है, इस जेट्टी का क्या नाम है?"

"क्यों?"

"इसलिये कि लौटते समय 'कैबी' से क्या कहोगे कि भैया 'यहां' जाना है!"

"हां यार, सही कह रहे हो…लेकिन मुझे मालुम नहीं है। देख, कहीं आस पास कोई साइन बोर्ड लगा होगा - जिस पर यहां का नाम लिखा हो…।"

हम दोनों ने गिद्धों की तरह इधर उधर नज़रें घुमायीं।

रोहित की आंखें शायद ज़्यादा तेज़ रही होगी, फट्ट से बोले, " अबे वो देख सामने बोर्ड लगा है, गेट के पास।"

मैं ने बटुए से एक पुरानी मुड़ी तुडी रसीद निकाली और पेन लेकर बोर्ड की ओर बढ़ लिये। पास पंहुचे तो मैं थोड़ा झुंझला भी गया," अबे ये केवल फ़्रेन्च में ही क्यों लिखते हैं, इंगलिश में भी लिखना चाहिये ना!"

"की फ़रक पैंदा यार, स्क्रिप्ट तो रोमन ही है ना! तू लिख मैं स्पेलिंग बोलता हूं।"

रोहित की बताई स्पेलिंग मैं ने ध्यान से लिख ली, जगह का नाम कुछ इस प्रकार का उभर कर आया “EL NINGUN FUMAR”.

“बड़ा अजीब नाम है!” मैं ने प्रतिक्रिया करी।

“हमें क्या करना, इनका देश है जो चाहे नाम रखें…वैसे भी फारेन में तो मुझे हर चीज अजीब लगती है। स्याले अपना देश इतना साफ़ कैसे रख लेते हैं, यह भी अजीब लगता है…।“ बिना मतलब की इस टिप्पणी पर हम दोनो हें हें करके खूब हंसे!

खैर गेट के बाहर से एक कैब पकड़ कर शहर गये, घूमे-फिरे, फ़्रेन्च काफ़ी पी, वाइन वगैरह चखी, घर फोन किया बातें करी और फिर रोज मर्रा की चीज़ें खरीद कर वापस जहाज़ पर आने की सोची।

सड़क के किनारे एक कैब को फ़्लैग किया, उसने गाड़ी रोकी और खिड़की से मुण्डी बाहर निकालते हुये कहा, “ काला अक्षर भैंस बराबर।“ (मतलब कि भगवान जाने उसने फ़्रेंच में क्या कहा हमारे लिये तो वह काला अक्षर भैंस बराबर ही था।)

“लवेरा पोर्ट्।“

“काला अक्षर भैंस बराबर।“

“ल वे ए रा आ पो ओ ओ र त”, हमने धी ई ई ई ई ई रे - धी ई ई ई ई ई रे अपनी बात कही।

“काला अक्षर भैंस बराबर।“

तभी रोहित को पर्ची का ख़्याल आया, “ अबे इसे पर्ची दिखा, समझ जाएगा।“

मैं ने झट पट जेब से पर्ची निकाली और कैबी हो दिखाई। उसने ध्यान से पर्ची देखी फिर बड़े ही विस्मित भाव से हमारी ओर देखते हुये कहा, “काला अक्षर भैंस बराबर।“ और हंसते हुये वहां से गाड़ी ले कर फुर्र हो गया।

हमें बड़ी गुस्सा आई। Anyway, हमने फ़ैसला किया कि हम कैब स्टैंड से जाकर कैब लेते हैं। वहां पहुंचे तो 6 -7 कैब्स खड़ी थीं।

हम पहले वाले के पास गये और बिना टाइम वेस्ट किये हुये उसको पर्ची थमा दी और उंगली से पर्ची की ओर इशारा करते हुये कहा, “ Go here.”

“काला अक्षर भैंस बराबर।“

“Yes, yes go here…go here…”

“काला अक्षर भैंस बराबर।“ बड़बड़ा कर वह ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा। हमें थोड़ा गुस्सा आया, थोड़ी झुंझलाहट हुयी और काफ़ी शर्म सी भी आयी। खैर उसको छोड़ कर हम अगले कैबी के पास गये लेकिन वहां भी ऐसा ही कुछ हुआ।

रोहित के लिये यह अब असहनीय होता जा रहा था, अगले कैबी तक पहुंचते हुये बोला “अबे पर्ची फेंक मैं बोल कर ही समझाता हूं।“

अगले कैबी के पास आकर रोहित बोला, “लवेरा पोर्ट!”

“काला अक्षर भैंस बराबर।“

रोहित ने तमाम Sailors की सबसे लोकप्रिय भाषा यानी सांकेतिक भाषा का प्रयोग करने की सोची और फिर मुंह पर हाथ लगा कर जहाज़ के भोंपू की आवाज़ निकाली, “ भों ओ ओ ओ …।“

“काला अक्षर भैंस बराबर।“ कैबी बोला।

रोहित डटा रहा और अपनी ‘डम्ब शेराड’ की योग्यता का अविरत परिचय देता रहा, इस बार उसने अपने हाथ पंखों की तरह दायें बायें उठा कर इधर से उधर झूमने लगा बिलकुल वैसे ही जैसे खराब मौसम में जहाज़ Rolling करता है। और साथ में बोलता भी गया, “ Ship…..Loading…..Petrol…..Boat…..Port……Big Ship…… Foreign….. Come in……Go out…….Sea……Seaman……Seafarer……” उसका यह तरीका मुझे बड़ा रोचक लगा और सोचा कि मैं भी इसमें कुछ योगदान करूं।

तो उधर रोहित संकटमोचन को याद करके हनुमान चालिसा बांच रहे थे इधर मैं भी हाथ उठा कर Rolling करते हुये सुंदर काण्ड का पाठ करने लगा, “ Tanks….Tanker….Oil Tanker….. Ship Tanker….. Port….. Quay….. Jetty….. Berth…. Harbour…..”

भगवान जाने इतने सारे शब्दों में से उसे कौन सा समझ में आया अचानक वह बोला, “Ok Ok….” और हमें कैब में बैठने का इशारा किया। हमारी सांस में सांस आयी और इसके पहले कि वह अपना दिमाग बदलता हम लप्प से कैब में घुस गये।

कैब चल तो पड़ी लेकिन लगता था कि कैबी को हमारी बात पूरी तरह से समझ में नहीं आई थी। वो भी काफ़ी देर तक इधर उधर भटकते रहे। हम दोनों भी अपनी अपनी खिड़कियों से look out रखे हुये थे कि शायद कोई जाना पहचाना landmark दिख जाये। तभी दूर हमें अपने जहाज़ की Funnel (जिससे धुंआ निकलता है – चिमिनी) दिखी, हम दोनों ने लगभग कूदते हुये एक साथ बोला, “There…there….our ship.”

इस तरह रो पीट कर हम जैसे तैसे ‘अपने घर’ पंहुचे।
बाद में पता चला कि बोर्ड से हमने अपनी पर्ची पर जो "El Ningun Fumar" टीपा था वह दरअसल उस जगह का नाम नहीं था बल्कि वह एक चेतावनी लिखी थी जिसका अर्थ होता है "धूम्रपान निषेध"। लौट के बुद्धू घर को आये।

हर नाविक का अपने जहाज़ से एक अजीब सा नाता होता है। मालूम तो होता है कि कुछ ही महीनों में इस जहाज़ से विदा लेकर ‘घर’ वापस जाना है। लेकिन कुछ दिन या कुछ महीने जो उस जहाज़ पर बिताता है, वो उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बन कर हमेशा उसके साथ जीते रहते हैं। कभी भी जब उन जहाज़ो की फोटो देखता हूं, जिन पर कभी काम किया था तो मुंह से यही निकलता है, “My Ship!”.

मेरे आफिस की खिड़की से सिंगापुर हार्बर दिखता है, लंगर गिराये खड़े हुये जहाज़ भी दिखते है। और उन जहाज़ों के डेक्स पर एक अलग किस्म की ज़िंदगी सांस लेती हुयी दिखायी देती है।

शहर की तेज़ी से भागती, नोंच खसोट करती, दूसरे को धक्का देती हुयी, कुचलती हुयी, प्रदूषण से भरी ज़िंदगी से दूर एक ऐसी ज़िंदगी जहां 9 से 5 नहीं है, हवा में प्रदूषण नहीं है, गले में टाई नहीं है, सेमिनार नहीं है, Cocktails & Curtains down नहीं है…

शोर है तो बस समुद्र की लहरों का, रात है तो इतनी अंधेरी की सारे तारे बिलकुल साफ़ नज़र आते हैं, सुबह का सूरज रोज़ सुबह समुद्र से नहाते हुये निकलता है, धुंये और गर्द का कंबल ओढ़े हुये नहीं। और इन सबके बीच में क्षितिज के उस पार अपनी मंजिल की ओर बढ़ता एक जहाज़ है, एक नाविक है जो बिना रास्तों के महासागर में भी अपने रास्ते बनाता हुआ मंज़िल पाने का हौसला रखता है, तूफ़ानों से लुका छिपी खेलता है - एक ऐसा गुमनाम इंसान जिसके पैरों के निशान तक हम पानी में नहीं ढ़ूंढ पाते हैं…। लेकिन फिर भी उसके दिल में उमंग है और होठों पर है यह गीत,

We’re on the road
We’re on the road to anywhere

With never a heartache
With never a care

Got no homes
Got no friends

And thankful for anything
The Good Lord sends
EOSP @ 17:30 hrs on 10-Nov-2006.

9 टिप्‍पणियां:

manisha ने कहा…

jahaj ki yaade abhi bhi man me basi hui hai......hota hai bhai har insaan kisi na kisi yaad ke sahare hi kabhi kabhi kusha ho jata hai.......aakhiri ki pantiyo ne bahut bhavuk kiya

Raman Kaul ने कहा…

बहुत ही रोचक संस्मरण है। क्या कभी फिर उस ज़िन्दगी में लौटने का दिल करता है? यह बात बड़ी रोचक है कि हर प्रकार का जीवन एक पैकेज डील की तरह होता है, कुछ अच्छा कुछ बुरा। वैसे "धूम्रपान निषेध" को स्पैनिश में "el ningún fumar" कहा जाता है, फ्राँस के पोर्ट पर इस भाषा में क्यों लिखा था, क्या वहाँ भी मज़दूरों का कोई वर्ग स्पैनिश बोलता है, जैसे अमरीका में?

संजय बेंगाणी ने कहा…

धुम्रपान निषेध....जाना है....ले चलो.
बड़ी रोचक घटना हैं, मजा आया पढ़ कर.

Laxmi N. Gupta ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है, अनुराग जी। मज़ा आगया। धूम्रपान निषेध! वाह, वाह!

Manish ने कहा…

एक नाविक का अपने जहाज को इस प्यारे अंदाज में याद करना अच्छा लगा !

अनूप शुक्ला ने कहा…

बहुत अच्छा लगा यह संस्मरण पढ़्कर. आगे का इंतजार है

अनुराग श्रीवास्तव ने कहा…

मनीषा, संजय, गुप्तजी, मनीष और अनूप,

हौसला बढ़ाने के लिये आप लोगों को बहुत धन्यवाद.

रमण - सच बात तो यह है कि याद तो बहुत आता है लेकिन फिर भी वापस जाने का मन नहीं करता. सच कहा 'पैकेज डील' है. "el ningún fumar" फ़्रेन्च नहीं स्पैनिश है मुझे सचमुच नहीं मालूम था मेरे लिये तो दोनों ही हालात में काला अक्षर भैंस बराबर है. सच्ची! बताने के लिये ढेर सारा धन्यवाद:)

Pratyaksha ने कहा…

बहुत रोचक ! अच्छा लगा , खासकर 'काला अक्षर भैंस बराबर ' :-)

Jagdish Bhatia ने कहा…

बहुत ही रोचक तरीके से लिखा है। :)